माँ


शरीर कितना भी थक जाए माँ का,
मन नहीं थकता।
पुत्र अगर समीप हो तो,
घर का चूल्हा कभी नहीं बुझता।
जो भी चाहो, जब भी चाहो,
पक कर गर्म थाली में मिलता।
शरीर कितना भी थक जाए माँ का,
मन नहीं थकता।

 

परमीत सिंह धुरंधर

Leave a comment