Theory of Relativity


Two beautiful eyes were besides me, thats how, sometime, you end your tiring day. And the result is you get up at 5.49 AM even if you slept 1.30 AM.

 

Parmit Singh Dhurandhar

डोली


तुम पराई तो नहीं, बस एक डोली उठ जाने से,
लहू लाल है नशों में दोनों के, एक ही पिता से.
रोशन तुमसे आज भी है ये आँगन और पिता का नाम,
तुम परछाई तो नहीं एक घर बदल जाने से.

 

परमीत सिंह धुरंधर

दरिया -ए -चिनाब


खुदा का सहारा मिला होता,
तो हम भी दरिया -ए -चिनाब होते।

 

परमीत सिंह धुरंधर

मंडप


हम दोनों के परिवार वाले नहीं मान रहे थे. इसलिए आज नदी किनारे हम दोनों भविष्य के भावी कदम  उठाने के लिए मिले थे. मेरे परिवार के सख्त विरोध की बात सुनकर उसने अपना क्रोध इस तरह ब्यक्त किया की साड़ी गलतिया मेरी ही परिवार वालो की निकलने लगी.
सुरोधी: ” तो तुम परिवार वालों के चलते मुझसे शादी नहीं करोगे। इतने दिन तक फिर ये सब क्या था? मेरे शरीर से खलने के बाद परिवार वालों का ख़याल आया. परिवार वालों से पूछ लेते पहले फिर मेरे तन पे हाथ रखते। तुम वासना से ग्रसित हो, अगर प्यार रहता तो अब परिवार की बात नहीं करते।”
मैं:”मगर क्या तुम अपने परिवार के खिलाफ जाओगी?”
सुरोधी: ” मैं तुम्हारे लिए सब कुछ छोड़ सकती हूँ. मेरा प्यार सच्चा है. तुम्हारी तरह शरीर का भूख नहीं। सब मर्द कुत्ते होते हैं.”
अंततः मैंने तय किया की परिवार के खिलाफ जाके सुरोधी को अपना बनूँगा। सुरोधी ने मुझे गले लगा लिया।

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
6 महीने से मैं अपने परिवार से अलग रह रहा हूँ, कोई बात चित नहीं। इस बीच सुरोधी ने हर बार मेरी शादी की बात को टाल दिया। पिछले महीने मैंने उससे बिना पूछे ही कोर्ट में शादी का आवेदन कर दिया। आज शादी की तारीख मिलने पे, मैं सीधे सुरोधी के घर उससे बताने बताने पहुचा। सोचा पहले तो वो गुस्सा होगी पर बाद में खुश होगी ये जानकार की मैं सिर्फ उसके शरीर के पीछे नहीं हूँ.
दरवाजे को सुरोधी की छोटी बहन ने खोल और वो मुझे देख के सकपका गयी. अंदर काफी लोग थे और अचानक मुझे एक जोरदार धक्का लगा. सामने सुरोधी की सगाई का सामारोह चल रहा था, और उसकी हाथों में सगाई की अंघुठि जगमगा रही थी. उसके चेहरे पे सर्द हवाएं छाने लगी, मुझे देख कर. मैंने उसको बधाई दिया और वहाँ से निकल गया. भाड़ी क़दमों से चलता हुआ मैं बस यही सोच रहा था क्यों किया उसने ऐसा मेरे साथ. शायद लोगों ने सही कहाँ है लडकिया ऊँचे पेड़ पे चढ़ा के गिराती हैं. उन्हें बिना घर तोड़े किसी का, मंडप में बैठना पसंद नहीं है.

For the Valentine’s Day

परमीत सिंह धुरंधर

कहिया थ्रेसर से दवनी होइ?


हमारा जोबनवा के गईंठी ए राजा,
तहरा बथनियाँ में कहिया जली?
मन भर के चिपरी पथा गइल बा,
रउरा आलाउवा में कहिया जली.
अंग – अंग हमार गेहूं के बाली भइल बा,
कहिया थ्रेसर से दवनी होइ?
गन्ना, सरसों से भड़ गइल खलिहान,
अब महुआ के रस, राजा कहिया चली?
हमारा जोबनवा के गईंठी ए राजा,
तहरा बथनियाँ में कहिया जली?

अंखिया भी देखअ सुरमई बहिल बा,
केशिया में सावन गदराइल लागल बा.
अंखिया के हमारा तीर ए राजा,
तरकश पे रउरा कहिया चढ़ी?
गजरा के हमार फूल ए राजा,
खटिया पे रउरा कहिया टूटी?
हमारा जोबनवा के गईंठी ए राजा,
तहरा बथनियाँ में कहिया जली?

 

परमीत सिंह धुरंधर

शहादतों को सरहदों में मत बांटों


शहादतों को सरहदों में मत बांटों,
भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद,
भारत की आज़ादी के लिए लड़े थे,
ना की हिन्दू कौम के लिए.
सुभाषचंद्र बोस की लड़ाई ब्रिटिशों से थी,
ना की मुस्लिमों से.
फिरकापरस्त है वो लोग जो, धर्म और क्षेत्र में,
बाँट रहे हैं देशभक्तो को.
अस्फाकुल्लाह खान हों या टीपू सुलतान,
सब भारत की शान हैं.
उनकी शहादत भारत के लिए थी,
ना की मजहब और अपने कौम के लिए.

 

परमीत सिंह धुरंधर

अमीर खुद -ब-खुद बन जाएंगे


मिल कर कुछ दूर तो संग चले,
हौसले खुद-ब-खुद बढ़ जाएंगे।
एक पत्थर तो तोड़े संग बैठ के दोस्तों,
रास्ते खुद-ब-खुद सरल-सुगम हो जाएंगे।
मंजिलों की चाहत नहीं,
इस कदर तन्हा कटी है जिंदगी।
बस एक कारवाँ मिल जाए,
मंजीले हम खुद बना लेंगें।

सितारें जमीं पे लाने की कोसिस करने वालो,
कभी दिलों के दर्द को मिटा के तो देखो।
इस गुलशन की खुश्बूं आसमान तक जायेगी,
कभी फूलों को भौरों से मिला के तो देखो।
हाथ थाम कर कुछ देर तो संग बैठें,
हर जख्म खुद-ब-खुद मिट जाएंगे।
कुछ और नहीं तो,
किस्से -कहानियां ही बाँट ले संग में,
अमीर तो हम खुद -ब-खुद बन जाएंगे।

 

परमीत सिंह धुरंधर