कमल को पुलकित कर देंगे


हम हर तस्वीर को बदल देंगें,
सबकी तकदीर को बदल देंगे।
हम योगी ही नहीं, वैरागी भीं है,
कण-कण में कमल को पुलकित कर देंगे।
वो जो कहतें हैं की मेरी छवि दागदार है,
उनके गिरेवान में देखिये, कितने आस्तीन के साँप हैं.
हम दिन के ही नहीं, बल्कि उनके रातों के गुनाह को भी,
सरे आम, उजागर कर देंगे।
हम योगी ही नहीं, वैरागी भीं है,
जन्नत – से -जहन्नुम तक की सब राहें समतल कर देंगे।
हम योगी ही नहीं, वैरागी भीं है,
कण-कण में कमल को पुलकित कर देंगे।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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