इश्क़ ने मेरे समुन्दर सूखा दिया,
हुस्न ने उसके बादलों को पिघला दिया।
मैंने सारी दौलत लुटा दी उसके मुस्कराहट पे,
और अंत में उसने उसी दौलत के लिए,
मेरा प्रेम ठुकरा दिया।
परमीत सिंह धुरंधर
इश्क़ ने मेरे समुन्दर सूखा दिया,
हुस्न ने उसके बादलों को पिघला दिया।
मैंने सारी दौलत लुटा दी उसके मुस्कराहट पे,
और अंत में उसने उसी दौलत के लिए,
मेरा प्रेम ठुकरा दिया।
परमीत सिंह धुरंधर