ख्वाब अधूरें हैं


मुझसे तुम्हारे दिल के,
माना की जज्बात अधूरें हैं.
कई रातों से जल रहा है जो दीपक,
उसके तो अब तक, सारे ख्वाब अधूरें हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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