मुझसे तुम्हारे दिल के,
माना की जज्बात अधूरें हैं.
कई रातों से जल रहा है जो दीपक,
उसके तो अब तक, सारे ख्वाब अधूरें हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
मुझसे तुम्हारे दिल के,
माना की जज्बात अधूरें हैं.
कई रातों से जल रहा है जो दीपक,
उसके तो अब तक, सारे ख्वाब अधूरें हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
समुन्द्र अभी तक प्यासा ही है,
किनारों ने ऐसे बाँधा है.
तुम्हारा इंतज़ार है हमें जन्मों से,
मेरी साँसों ने ऐसे तुम्हे छुआ है.
परमीत सिंह धुरंधर
मेरे दुश्मनों की कमी नहीं है,
इस शहर से उस शहर तक.
ता उम्र बस यही,
दौलत तो कमाया है.
मैं भले ही नास्तिक हूँ खुदा,
पर सारे जमाने को आस्तिक बनाया है.
परमीत सिंह धुरंधर
वो जो कल तक इठलाती थीं,
अपनी अंगराई पे.
मुझे ठुकरा दिया,
किसी और की शहनाई पे.
शादी के बाद, जाने क्यों?
कुम्हलायी सी लगती हैं.
लड़कियाँ,
अक्सर शादी के बाद ही सही,
लेकिन अपनी आशिक की
परछाई को तरसती हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
यूँ ही नहीं हैं बहारें मेरी किस्मत में,
मैंने कइयों को रौंदा हैं, टकराने पे.
तूफानों को भी पता है, मेरे गावँ का पता,
यूँ ही नहीं मुख मोड़ लेती हैं आंधियाँ मेरे दरवाजे से.
परमीत सिंह धुरंधर
सफर का नशा तेरी आँखों से है,
वरना मंजिलों की चाहत अब किसे है?
मैं चल रहा हूँ की तुम साथ हो,
वरना इन साँसों की चाहत अब किसे है?
परमीत सिंह धुरंधर