महान पिता का पुत्र कभी खोटा नहीं होता,
IRS/IAS होने से कोई ऊँचा नहीं होता।
कर्म ही किसी का उस गर्त तक ले जाता है,
जहाँ फैसला उसके शक्लों – सूरत पे नहीं होता।
परमीत सिंह धुरंधर
महान पिता का पुत्र कभी खोटा नहीं होता,
IRS/IAS होने से कोई ऊँचा नहीं होता।
कर्म ही किसी का उस गर्त तक ले जाता है,
जहाँ फैसला उसके शक्लों – सूरत पे नहीं होता।
परमीत सिंह धुरंधर
मत पूछ मेरे दिल से समुन्दर का पता,
वो बहता है इसी के हौसलों से यहाँ।
कब तक इंसान बैठेगा खुदा के भरोसे,
कभी -न – कभी हाथों में हल उठाना होगा।
अगर माँ बैठ जाएँ की खुदा पाल देगा बच्चो को,
तो ए मंदिरों, खुदा का नामों-निशान नहीं होगा।
वो बांटते हैं घूम-घूमकर चिट्ठी अपने माफ़ी की,
ये बता रहा है की उनकी औलादों का हुनर क्या होगा।
परमीत सिंह धुरंधर
It’s my dream to have you within my arms
But it’s a goal to live with you within the four walls.
It’s my dream to see you smiling
But it’s a goal to keep it happening.
Parmit Singh Dhurandhar
She is beyond my bed
Who cares for color and her shape?
I just need her presence
Who cares the size of the waist?
The life is small
If we start counting.
And it is infinite,
If we just stick with one.
Parmit Singh Dhurandhar
You reflect me
Better than my mirror.
So, I don’t need
Anything to wear.
It’s my dream
You keep me warm
Throughout the year.
Parmit Singh Dhurandhar
चाहे कंगन हो या कमंडल हो,
राजपूतों के साथ दंगल और मंगल हो.
परमीत सिंह धुरंधर
चाहे दंगल हो या मंगल हो,
राजपूतों के साथ बस कमंडल हो.
परमीत सिंह धुरंधर
Give me, give me -5
That dirty looks
Yeah, yeah that dirty looks
I want someone to open the hooks
Yeah, yeah, my hooks.
Give me, give me -5
That dirty looks
Yeah, yeah that dirty looks
I love making moves
Yeah, yeah, all crazy moves.
Drinks and music make me wild
You are welcome to join
I want this night to be like honeymoon
Yeah, yeah, like my honeymoon.
Give me, give me -5
That dirty looks
Yeah, yeah that dirty looks.
Parmit Singh Dhurandhar
सैया माँगता दाल पे आचार
घी, दही सजाव छोड़ के.
का से कहीं दिल के बात सखी
आपन लोक-लाज – शर्म छोड़ के.
सांझे के सेजिया पे पसर जालन
कतनो बैठीं श्रृंगार करके।
सैयां निकलल बाटे नादान
का से कहीं, लोक-लाज – शर्म छोड़ के.
तनको ना छुए मिष्ठान
चाहे रख दी चोली खोलके।
तूड़ देहलन सारा दिल के अरमान
का से कहीं, लोक-लाज – शर्म छोड़ के.
परमीत सिंह धुरंधर
मुझे तुमसे मोहब्बत का
हर साल इरादा है.
मेरी चोली कह रही है
तू इसका धागा है.
खुद ही सिलूँगी
खुद ही टाकुंगी।
तुझे सबसे छुपा के रखने का
ये ही अच्छा बहाना है.
मेरे अंग-अंग से खेल
तू भ्रमर सा गुनगुना के.
मेरा यौवन कह रहा है
तू इसका नशा है.
परमीत सिंह धुरंधर