कबी अपन नाटन का भी जिकार कर डिजिये। जिंदगी का कुच यस भी लूफ़्ट लिजिये। कब तक गुजरोग जिंदगी भटकक कर। कबी मात्र कामरे को हाय अपना घर मान लिजिये.माणा की पारिओन सी नाही हुन हसीन। 

Leave a comment