वो शिव है


अनंत है जो
वो शिव है.
विराज है कैलाश पे
पर समस्त ब्रह्माण्ड
अधीन है.
सर्वस्व का त्याग कर
सर्वस्व का स्वामी है.

योगी है, वैरागी है
भूत-भभूत, भुजंगधारी है.
गरल को तरल कर दे
सरल-ह्रदय, प्रचंडकारी है.
सर्वस्व का त्याग कर
सर्वस्व का स्वामी है.

काल को स्थिर करे
प्रचंड को सूक्ष्म करे.
नग्न-धरंग, अवघड़-अलमस्त
जटाधारी है.
सर्वस्व का त्याग कर
सर्वस्व का स्वामी है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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