उम्र ही है ऐसी अभी


ना नजर से नजर को मिलाया करो
उम्र ही है ऐसी अभी, दुरी रखा करो।
चाहत है तुमको मेरे इन लबों की
तो जमाने भर में ना गाया करो.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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