मैं कैसे ज़िंदा हूँ सालों से?


ज़िंदा जिस्म है, रूह नहीं
तनहा रूह है, जिस्म नहीं।
मैं कैसे ज़िंदा हूँ सालों से?
आके देख ले.
साँसे चल रहीं है, दिल नहीं।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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