हरी मिर्च न लगाया करो


मीठे – मीठे अरमानों पे मेरे, हरी मिर्च न लगाया करो
हल्दी पीस के बैठी हूँ बालाम, यूँ सौतन से न छपवाया करो.

गरम किया है तेल सरसों का, गूँथ के बैठी हूँ चंपा – चमेली
मेरे ह्रदय के पुष्पित पुष्पों को, यूँ सौतन का गजरा न बनाया करो.

परमीत सिंह धुरंधर

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