दाल-रोटी खायेंगें


दो तेरे नैना गोरी
ले गए दिल मेरा उड़ा के.
आ जा मेरी बाहों में
अब मायका भुला के.

दाल-रोटी खायेंगें साथ में
उसमे मक्खन मिला के.
आ जा मेरी बाहों में
अब मायका भुला के.

तू संभालना चौका – चूल्हा
मैं लाऊंगा गाय-भैंस घास चरा के.
आ जा मेरी बाहों में
अब मायका भुला के.

प्याज -रोटी खा लेंगे
होली में तुझे नई साड़ी दिला के.
आ जा मेरी बाहों में
अब मायका भुला के.

इश्क़ संग लड़ा लेंगे
पीपल तले अलाव जला के.
आ जा मेरी बाहों में
अब मायका भुला के.

शास्वत प्रेम होता है बिहारियों का अपनी पत्नियों से. और लड़कियाँ अमेरिकन से शादी कर रही हैं.
आने वाली पीढ़ियाँ तरस जाएंगी ऐसे प्रेम को. और ना ये संग्रहलाय में मिलेगा ना, और ना स्विटरज़रलैंड की बादियों में.

परमीत सिंह धुरंधर

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