काली – काली सी हीर


तू काली – काली सी
पर लगती है कोई हीर.
कभी अकेले में मुझसे मिल
संग लगाएंगे कचहरी।

जितना तुझे देखता हूँ
उतनी तू भा रही.
ये नशा है मेरा
या तेरी जादूगरी।

परमीत सिंह धुरंधर

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