हाले-दिल


जो मेरे दिल के टुकड़े -टुकड़े
तेरे नयनों से हुए.
किन राहों में थाम के तुमको
बतलाऊँ हाले-दिल प्रिये।

परमीत सिंह धुरंधर

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