मैं शिव-शंकर सा भोला हूँ


प्रिये प्रेम मिलन में मैं तुमसे
प्रति दिन ही हारा हूँ
तुम छलती हो नैनों से
और मैं शिव-शंकर सा भोला हूँ.

तुम मृग बनकर कुलांचे भरती
मधुवन के सारे पथों पे
मैं मीरा सा तुम्हारे एक दरस को
जन्मों की प्यास संजों बैठा हूँ.

परमीत सिंह धुरंधर

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