वो सैया जी रउरा से देहिया लगा के
ना रहनी घर के, ना रहनी घाट के.
माई-भौजाई रखतारी २४ घंटे अब आँख
अंगना-दुवारा होता बस हमरे बात
की अबकी होली के बाद, हो जाइ पीला हमर हाथ.
वो सैया जी रउरा से अंगिया लगा के
ना रहनी घर के, ना रहनी घाट के.

परमीत सिंह धुरंधर 

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