अब अनंत हो गयी


जहाँ दर्द मिटे दिल का
वो नयन कहाँ मेरे?
जिसे बाँध लूँ बाहों में
वो ख्वाब कहाँ मेरे।

इन तारों -सितारों की
किस्मत नहीं मेरी
जो दूर करे मेरा अँधियारा
वो दीप कहाँ मेरे?

यह प्यास मेरे दिल की
अब अनंत हो गयी
जो अंत करे इसका
वो अधर कहाँ मेरे?

परमीत सिंह धुरंधर 

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