श्री हरी


थकते नहीं निहारते
रह -रह कर पुचकारते
अघाते नहीं थाम के.
चक्रवर्ती सम्राट
चूमते शिशु-पाँव
भूलकर ताज
और महल चमचमाते।
माँ देख रही
प्रजा हंस रही
एक बालक के कहने पे
सम्राट मटक-मटक नाचते.

परमीत सिंह धुरंधर 

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