खाट लगाके


कटती नहीं हैं रातें पिया परदेश में आके
एक रात तो बिता लो संग खाट लगाके।

किससे करूँ मन की बातें, किसके संग मनुहार?
कोई दर्द फिर जगा दो, सीने से हमको लगाके।

Rifle Singh Dhurandhar

बालाम परदेशी हो गए


देहिया गुलाबी करके
नयना शराबी करके
बालाम परदेशी हो गए.

मनवा के गाँठ खोल के
चिठ्ठी – आ – पाती पढ़ के
बालाम परदेशी हो गए.

अंग – अंग पे निशानी दे के
चूल्हा-चुहानी दे के
बालाम परदेशी हो गए.

मुझको बेशर्म करके
लाली और मेहँदी हर के
बालाम परदेशी हो गए.

मुझसे छुड़ा के मायका
मुझको दिला के चूड़ियाँ
बालाम परदेशी हो गए.

करवट मैं फेरूं रात भर
सुनकर देवरानी की चुहल
बालाम परदेशी हो गए.

Rifle Singh Dhurandhar

बदनाम – बेशर्म – पावन – खलिहान – खाट


ए मेरे दिलवर
मुझे प्यार करके तू
बदनाम कर दे आज-२.

फिर पाने को तुझे
ढूंढती रहूं
बेशर्म होके मैं
हर सुबहों -शाम.

मेरा रूप-रंग, यौवन,
ये साजों-श्रृंगार
छू कर इन्हें
पावन कर दे आज.

तू बरसे मुझपे
बादल बनके
मैं भींगती रहूं
सारी-सारी रात.

लूट जाने दे मुझे
खलिहान में अपने
इससे मीठी ना होगी
किसी आँगन की खाट.

Rifle Singh Dhurnahdar

Pain


The pain in my heart
Is like a river now.
It is wider, sluggish
Without heavy waves
But deeper now.

The pain in a heart
Is like acoustic waves.
With time
The wavelength becomes wider
With smaller amplitude
And waves become
Transverse from longitudinal.

Rifle Singh Dhurandhar

Honey


After making lots of kisses
I realized
The sweetest
The purest thing
In this world is honey.

Rifle Singh Dhurandhar

छपरहिया


हम छपरहिया
जैसे घूमे हैं पहिया
अरे, दुनिया घुमा दें.

अरे तीखें नैनों वाली
चोली की लाली
अरे हम चाहें तो
आँखों का सुरमा चुरा लें.

यूँ तो भोले -भाले
हैं हम सीधे -सादे
आ जाएँ खुद पे
तो बिजली गिरा दें.

Rifle Singh Dhurandhar