ये जो इल्म होता


दर्द में मैं नहीं तू भी है साकी
ये जो इल्म होता तो तुझे बेवफा ना कहते।

होते हैं रंगबाज सभी छपरइया
ये जो इल्म होता तो हमसे ना टकराते।

जूनून आज भी है मुझे बुढ़ापे में
ये जो इल्म होता तो वो घूँघट ना उठाते।

शौक कई पाल रखे हैं दिल में
ये जो इल्म होता तो वो ना मुस्कुराते।

Rifle Singh Dhurandhar

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