तुम कहीं पत्थर ना हो जाओ


कब तक दिल को बाँधोगे
कहीं सुख न जाए अश्क इन आखों से.
मैं तो प्यासी रह जाउंगी,
तुम कहीं पत्थर ना हो जाओ माटी से.
और क्या माँगा हैं एक दर्शन के सिवा?
कब तक ठुकराओगे, कहीं कंठ ना रुंध जाए.
मैं तो प्यासी रह जाउंगी
तुम कहीं पत्थर ना हो जाओ माटी से.

Rifle SIngh DHurandhar

बताओ गोविन्द।


कौन से मन से पुकारूँ तुम्हे?
बताओ गोविन्द।
जिसमे पीड़ा है, या जिसे तुमसे बाँधा है.
कौन से नयना से निहारूं तुम्हे?
बताओ गोविन्द।
जिसमे अश्क हैं या जिन्हें तुमसे लड़ाया है.
कैसे खुद को सजाऊँ?
बताओ गोविन्द।
चुनर-चूड़ी, जेवर से, या जो पुष्प तुमपे चढ़ाया है.
किस रंग को चढ़ा दूँ चुनर पे अपने?
बताओ गोविन्द।
जो ज़माने ने दिया मुझे, या जो तुमने मुझे लगाया है.

Riffle Singh Dhurandhar

क्यों नहीं?


हो गए एक तुम सारे जग के
फिर मेरे ही तुम क्यों नहीं?
हर रंग है तुम्ही से जग में
फिर मैं ही रंगी क्यों नहीं?
हर रस में हो तुम, हैं तुम्ही से पराग
फिर मिली मुझे ये मिठास क्यों नहीं?
पनपा हर जीवन तेरे सांचे पे
तेरी उँगलियों ने तरसा इन्हें
फिर मुझमे ही तेरी वो छुअन क्यों नहीं?
भज के एक तेरा नाम सभी
हो जाते हैं भाव सागर पार
एक मेरी ही बेड़ियाँ अभी तक टूटी क्यों नहीं?
राधा-रुक्मिणी, जामवंती, सभी को मिला तेरा साथ
फिर एक मीरा के आँचल में ही तू क्यों नहीं?

Rifle Singh Dhurandhar

गोविन्द, रहूंगी तुम्हारी चरणों में


रख दिया है दिल गोविन्द, मैंने तुम्हारी चरणों में
लाज रखो, या लूट जाने दो, रहूंगी तुम्हारी चरणों में.
पुलकित कली में तुम गोविन्द, तुम्ही हो उन्मत गज में
फिर कैसे कहोगे अनभिज्ञ हो तुम मेरे अन्तःमन से?
बाँध दिया है मन गोविन्द, मैंने तुम्हारी चरणों से
मान रखो, या मिट जाने दो, रहूंगी तुम्हारी चरणों में.
हंस कर पी जाउंगी गोविन्द, विष का भरा ये प्याला
तुम थामों ना थामों बाहें मेरी, मैं रहूंगी तुम्हारी चरणों में.
तुम हो सर्वज्ञ गोविन्द, तुम ही हो व्याप्त कण-कण में
फिर कैसे अनभिज्ञ हो, मेरी इस करुण-पुकार से?
सर्वश्व छोड़ कर गोविन्द, बैठी हूँ तुम्हारी चरणों में.
लाज रखो, या लूट जाने दो, रहूंगी तुम्हारी चरणों में.

Rifle Singh Dhurandhar

मेरे शिव तुम्हे प्रणाम


मेरे दाता, विधाता, ऐसे भुला ना ये नाता
जग में मैं जी रहा हूँ, बस लेकर एक ही नाम.
मेरे शिव तुम्हे प्रणाम, मेरे भोले तुम्हे प्रणाम।
मेरे शिव तुम्हे प्रणाम, मेरे भोले तुम्हे प्रणाम।

हठ करे बालक तो ये तो जग की शोभा है
तुम पिता हो मेरे,खुद को हठ में न बांधों.
मेरी गलतियों को भुलाकर रखना मेरा ध्यान।
मेरे शिव तुम्हे प्रणाम, मेरे भोले तुम्हे प्रणाम।

एक विनती पे, भगीरथ के, तुम थे दौड़े आए
बाँध के गंगा को लहरों में, मेरे शिव थे तुम लहराए।
फिर क्यों हैं अनसुनी प्रभु मेरी हर पुकार?
मेरे शिव तुम्हे प्रणाम, मेरे भोले तुम्हे प्रणाम।

मैंने रखी है ह्रदय में हर पल तुम्हारी छाया
फिर तन-मन पे मेरे क्यों है, काम-क्रोध की माया।
हो मेरा भी उत्थान दे दो पिता ये आशीर्वाद।
मेरे शिव तुम्हे प्रणाम, मेरे भोले तुम्हे प्रणाम।

Rifle Singh Dhurandhar

मोहब्बत


मोहब्बत यहाँ पे, ना किसी की हुई है
ना कोई मोहब्बत में बसा ही कहीं हैं.
लगा लो हाँ दिल को घडी -दो -घडी बस
उम्र भर यहाँ तो ना कोई किसी का.

Rifle Singh Dhurandhar

जिंदगी


गमे-दर्द में तुम बहकने लगे हो
सफर जिंदगी का, तुम थकने लगे हो.
गमे-दर्द में तुम बहकने लगे हो
ये सफर जिंदगी का, तुम थकने लगे हो.

सूरज वही है, चंदा वही-२
एक तारे के टूटने से डरने लगे हो.
पर्वत तुम्हारे हैं, पहाड़े तुम्हारी-२
एक दरिया के बहाव पे तुम थमने लगे हो.
गमे-दर्द में तुम बहकने लगे हो
ये सफर जिंदगी का, तुम थकने लगे हो.

काँटों से भरी है यहाँ राहें सभी की-२
तुम खुद ही हाँ दामान चुराने लगे हो.
क्या पाना यहाँ और खोना यहाँ-२?
ये कैसे सवालों में खुद को उलझाने लगे हो?
गमे-दर्द में तुम बहकने लगे हो
ये सफर जिंदगी का, तुम थकने लगे हो.

Rifle Singh Dhurandhar