जाने कैसी यादों का दर्द लिए बैठा हूँ?
महफ़िल है सजी, सजी महफ़िल में अश्क लिए बैठा हूँ.
तुम तो चले गए पिता, छोड़ अकेला मुझे दुनिया में
फिर भी अकेले ही इस दुनिया से जंग ठाने बैठा हूँ.
Rifle Singh Dhurandhar
जाने कैसी यादों का दर्द लिए बैठा हूँ?
महफ़िल है सजी, सजी महफ़िल में अश्क लिए बैठा हूँ.
तुम तो चले गए पिता, छोड़ अकेला मुझे दुनिया में
फिर भी अकेले ही इस दुनिया से जंग ठाने बैठा हूँ.
Rifle Singh Dhurandhar