अटल हो कर अनंत तक


ना गूढ़ रहो, ना मूढ़ रहो
मानव हो तो सरल रहो.
है हाथ में कलम तो
सत्य को साकार करो.
ना तो हल को धारण
कर किसान बनो.
हो अगर वंचित दोनों से
तो तन का श्रम से श्रृंगार करो.

जीवन का सार यही
गीता में प्रमाण यही
जय-विजय की कामना से रहित
अपने पथ का, अपनी मंज्ज़िल तक
स्वयं निर्माण करो.
अन्यथा भगीरथ सा
अटल हो कर, अनंत तक
अंतिम प्रयास करो.

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सावन की ये काली घटायें


गगन को मगन करके
बादलों में दामनी को चंचल करके
सावन की ये काली घटायें
धरा पे मृग, मोर, पुष्प को
प्रेम से पुलकित कर रहे.
भ्रमर को भ्रमित करके
नवयौवना के ह्रदय को झंकृत करके
सावन की ये काली घटायें
बरसो की विरह को नवरस
से पराजित कर रहे.

दूर बस तुम्ही हो मेरे साजन।
दिन साल हुए, साल विशाल हुए
तुम जाने किस मोहनी के मोह में
मेरी साँसों को निष्प्राण कर रहे.
नसों में नशा उतारू तो क्यों?
अधरों पे प्यास बसाऊं तो क्यों?
उर्वरित धरा को जब तुम
बीज-रहित रख रहे.
सावन की ये काली घटायें
तुम्हारे बाजुपाश-रहित
मेरे मन को व्यथित कर रहे.

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है जिंदगी कितनी खूबसूरत


है जिंदगी कितनी खूबसूरत अभी इन्हे पता नहीं है
पिता के पथ के पत्थरों का जिन्हे अभी तक पता नहीं है.
आँखों की जिनकी मीठी नींद को माँ कई रात सोइ नहीं है.
माँ के चरणों में जिन्होंने सर अभी तक झुकाया नहीं है.
है जिंदगी कितनी खूबसूरत अभी इन्हे पता नहीं है.
क्या लिखें शब्दों में तुम्हे, आँखों ने तुम्हारे बाद कोई देखा नहीं है?
प्यासे हैं वो ही अधर, जिन्होंने शिव भांग आपका चखा नहीं है.
है जिंदगी कितनी खूबसूरत अभी इन्हे पता नहीं है.

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सफर


प्राप्त क्या करे इंसान जब प्यास अधरों पे हो?
गुनाह क्या करे इंसान जब जिंदगी किसी की बाहों में हो?
रहा भी ना जाए बिना सोये जब किसी की जुल्फों में
रहा भी न जाए जब किसी को थामे बाहों में
तो थके भी कैसे, जब सफर किसी के आगोस में हो?
दूर जाए भी तो क्या इंसान, जब संसार किसी के वक्षों पे हो?

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Men


Night brings
moon, stars, stories,
and dreams.
It gives you a chance
to correct your mistake
and to connect with your roots.
But the quintessential message is
men are weak.
Men are weak as
we need a lap to have
a peaceful night.

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अंगिया भइल बा अंगार गोरिया


कहाँ जइबू ले के ई जवानी गोरिया?
ताहार अंगिया भइल बा अंगार गोरिया।
दुगो नयना भइल कटार जइसन
वो पे ललकि गालिया लागेला कसार गोरिया।
चोलिया के ताहर रंग देख चटकार
धनकता सारा जवार गोरिया।
ले के चले लू जब पगडण्डी
ताहार देहिया लागेला सितार गोरिया।
आ जा आज हमारा बथान में
तहरा बिना ना जाइ हमार बुखार गोरिया।
पकाव आज बैंगन और खिचड़ी
तहारा हाथ से चोखा लागेला शराब गोरिया।
सोना-चाँदी से लाद देम देहिया
जहिया बोलबू हमारा के भतार गोरिया।
इ जुबान ह छपरा के बाबू साहेब के
जाने ला हमके सारा बिहार, गोरिया।

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