ख्वाब


जो शाम गुजर गयी मुझे उसका इंतज़ार नहीं
जो शाम आने वाली है मुझे उसका भी ख्वाब नहीं।
क्यों की मेरी तन्हाइयों का कोई आदि नहीं
कोई अंत नहीं।

RSD

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