शौहर चुनकर


वो मिली तो मैं ढह गया भरभरा कर
इंतज़ार में जिनके खड़ा था एक दीवार बनकर।
मांगू भी तो खुदा बता उन्हें अपने लिए अब कैसे?
वो लौंटी तो हैं, पर किसी से सात-जन्मों का रिश्ता जोड़कर।
सदमा देकर दिल को वो मुस्कराने लगी हैं खुलकर
लौटीं हैं जब से किसी को अपना शौहर चुनकर।

RSD

Leave a comment