इशारों-इशारों में उसने बता दिया
कुछ भी नहीं मिला उससे घर बसाकर।
मैं टुटा और टूट कर बिखर गया
वो भी तन्हा रही सेज को सजाकर।
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इशारों-इशारों में उसने बता दिया
कुछ भी नहीं मिला उससे घर बसाकर।
मैं टुटा और टूट कर बिखर गया
वो भी तन्हा रही सेज को सजाकर।
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ना मिलो, ना मिलो, ना मिलो फिर से आजमाने के लिए
हम तेरी सोहबत में थे, खुद को मिटाने के लिए.
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तेरी जवानी का जब भी चर्चा चला
मयखानों में मेरा नाम चला.
तेरी हसरतों को पाले हुए सब जावाँ
उन्हें मेरे हस्र का पता चला.
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जो नहीं मेरे, वो तुम्हारे इस कदर
की रह-रह कर नजर जाए उधर.
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अभी रात का सफर है, दिन की क्या आरजू करें
खंडहरों में रहने वाले किसी से क्या गुफ्तुगू करें?
ख्वाब भी नहीं आते, इस कदर मुफलिसी है
जिंदगी को अब और कैसे बेआबरू करें।
मिला ना ऐसे कोई की करें दिल के हालत बयान
सभी की हसरतें थी की हम बस जी-हजूरी करें।
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अपनी बर्बादियों पे मुस्करा रहा हूँ मैं
और जमाना कहता है, कुछ छुपा रहा हूँ मैं.
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ए ग़ालिब बता कैसे काटे हम ये जिंदगी?
अधरों पे प्यास, मयखाना पास और जेब तंग हैं.
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कश्तियाँ लहरों पे, किनारों की तलाश में
तेरी जवानी, मेरा शहर पूरा का पूरा आग में.
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रौशनी को ही ढूंढते रहोगे या जलाओगे चिरागों को भी
मोहब्बत ही करते रहोगे या बनाओगे किसी को अपना भी.
बहुत मुश्किल है काटना अकेली ये जिंदगी
जवानी तो गुजर गयी भटकने में, भटकोगे क्या भुढ़ापे में भी.
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जो मिल रहे हैं तुझसे वो तेरे अपने है क्या
जो दूर हैं वो देख रहे तेरे सपने है क्या?
मैं नहीं तो तू नहीं, तू नहीं तो मैं नहीं,
बस ये ही एहसास है मोहब्बत
इसके आलावा भी कोई मोहब्बत है क्या?
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