जॉन एलीआ


जॉन एलीआ को पढ़ती हैं वो भी
जॉन एलीआ को पढता हूँ मैं भी.
जॉन एलीआ सदमे मैं है
फिर क्यों नहीं हम बने जीवनसाथी?
गंगा की मौजों सी वो भी
गंगा की मौजों सा मैं भी
गंगा खुद सदमे हैं है
फिर क्यों नहीं हुए हम हमराही?
लहू क्षत्राणी का उनमे भी
लहू क्षत्राणी का मुझमे भी
मेवाड़ की धरती सदमे में है
फिर कैसे जुदा हो गयी राहें इनकी।

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घटाव-जोड़


अजब है दुनिया, गजब है दुनिया और दुनिया के लोग
मिलने से पहले किसी से, कर लेते हैं घटाव-जोड़.
रह गया मैं तन्हा, इतना मैं तन्हा, ना मिला कोई मोड़
बस नजरों से ही उसने दिया ऐसा असाध्य-रोग.
सच्ची है मोहब्बत सभी की यहाँ इस जामने में
फिर जाने क्यों दो कदम चलकर ही देते हैं वो छोड़.

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साकी मेरा गैरों में हैं


रात का ख्वाब क्या पालूँ?
जब मेरी नींद उनकी बाहों में हैं.
सुकून कैसे पालूँ खुदा?
जब मेरा महबूब राहों में हैं.
प्यास मिटाऊं भी तो कैसे?
साकी मेरा गैरों में हैं.
वो मिली और कहने लगी
कर रहा कोई इंतज़ार उनका घर पे है.

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बराड़ी


पिया के बहियाँ में जैसे जाल में बराड़ी
रात भर खेले पिया, बड़ा बा खिलाड़ी।
ना दे ता चूड़ी, ना कंगन ना साड़ी
रात भर खेले पिया, बड़ा बा खिलाड़ी।

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दर्द


दर्द मिला तो मुस्कराने लगे
जख्म को कुछ यूँ छुपाने लगे.
बदला मौसम तो सभी बदल गए
हम भी दिखावे को बदलने लगे.
शौक रहा ना उनसे फिर मिलने का
हसरतों को दबा कर यूँ टहलने लगे.

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मुख मोड़े रहते हो


मासूम नजरों से मदहोस करते हो
क्या खूब लगते हो-२.
झुका कर पलकों को अपने करीब रखते हो.
क्या खूब लगते हो-२.
कोई छेड़ ना दे तुमको मेरा नाम लेके हाँ -२
इसलिए हर पल मुख मोड़े रहते हो.
हर रात गुजरती है तेरी मेरी यादों में
इसलिए तो हर सुबह तुम लेट आते हो.
मासूम नजरों से मदहोस करते हो
क्या खूब लगते हो-२.
झुका कर पलकों को अपने करीब रखते हो.
क्या खूब लगते हो-२.

Dedicated to Firoz Khan’s songs

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ख्वाब


जो शाम गुजर गयी मुझे उसका इंतज़ार नहीं
जो शाम आने वाली है मुझे उसका भी ख्वाब नहीं।
क्यों की मेरी तन्हाइयों का कोई आदि नहीं
कोई अंत नहीं।

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राजा जी हमरा के लूट लेहलन


अरे राजा जी हमरा के लूट लेहलन
पोरे-पोरे -२, दुःख देहलन।
हम त चिलाइनी माई-माई
उ एके बार में साग सारा खोट लेहलन।
पातर रहे कमरिया हमार
ओहिजा राजा जी लोड देहलन।
अरे राजा जी हमरा के लूट लेहलन
पोरे-पोरे -२, दुःख देहलन।

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जवानी कसार हो गइल


चढ़ल अइसन जवानी, कसार हो गइल
हमार सखिया के यार हमार भतार हो गइल.
टूटल नथुनी हमार आ उ बदनाम हो गइल.
सजल सेजिया हमार ओकर जी के काल हो गइल.
चढ़ल अइसन जवानी, कसार हो गइल
हमार सखिया के यार हमार भतार हो गइल.

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छपरा का धुरंधर


अदाओं में वो हैं समंदर
तो दर्द के हम भी सिकंदर.
हुस्न पे उन्हें है अपने गुमान
तो छपरा के हम भी हैं धुरंधर।

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