मंताज मेरे


मंताज मेरे, मंताज मेरे
मुझसे रूठा है क्यों ख्वाब मेरे
एक रात की नहीं है जिन्द्गगी
जन्मों का बना ले हमराज मुझे।

मैं बरसो से हूँ प्यासा यहाँ
एक आस लिए तेरे बरसने का हाँ
एक फूल तो आ खिला दे
ताप्ती धरती पे मेरे.

RSD

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