नजर की ख्वाइशें


नजर की ख्वाइशें, नजर में रह गयी
जो दिल में दबी थी, वो दिल में रह गयी.
हम पीते रह गए जिसकी याद में
वो सब मिटा के हाँ, डोली चढ़ गयी.
कुछ भी नहीं इश्क़ में एक धोखा के सिवा
और बेबसी देखिये की बेवफा को
कलम वफ़ा लिख गयी.
सोचा की दिल को संभल लेंगे, दिल को
संभाला ही था की वो फिर सामने दिख गयी.

RSD

तेरे अंगों पे कहीं पटना,कहीं छपरा तो कहीं सीवान दीखता है


तू मुस्कराये तो पुरे के पुरे मानचित्रा पे
पूरा -का – पूरा बिहार दीखता है.
तुम्हारे मम्मी -डैडी पूजनीय ही नहीं
सिर्फ मेरे लिए भगवान् ही नहीं
तुम्हारे मम्मी -डैडी, दादा-दादी, भाई-बहन
उनमे पूरा -का-पूरा ससुराल दीखता है.
तू शर्माए तो वो सर्दी की रात
वो बोरसी की आग
और उसमे पकता वो लिट्टी दीखता है.
तेरे नयन जैसे मेरे गावँ के पोखर
तेरी कमर, जैसे चलनी में चोकर
तेरी कमर पे झूलती ये चोटी
पीपल पे वो मेरा झूला दीखता है.
तू पूरी -की-पूरी मुझे मिल जाए
तो मुझसे धनवान कौन, बता?
की तेरे अंगों पे कहीं पटना,
कहीं छपरा तो कहीं सीवान दीखता है.

RSD

जय गणपति, जय-जय गणपति


जय गणपति, जय-जय गणपति
जय-जय गणपति, जय-जय.
दया करों हे गणराज, आपके चरणों में हूँ मैं.
दिव्या नयन है, विशाल कर्ण है
फिर क्यों है मेरी विनती अनसूनी।
आप ही एक हो जिसके सहारे
उतड़ आया हूँ रणभूमि।
अब तो तिलक लगा दो विजय श्री का
आपके चरण धोऊंगा मैं.
जय गणपति, जय-जय गणपति
जय-जय गणपति, जय-जय.