नजर की ख्वाइशें


नजर की ख्वाइशें, नजर में रह गयी
जो दिल में दबी थी, वो दिल में रह गयी.
हम पीते रह गए जिसकी याद में
वो सब मिटा के हाँ, डोली चढ़ गयी.
कुछ भी नहीं इश्क़ में एक धोखा के सिवा
और बेबसी देखिये की बेवफा को
कलम वफ़ा लिख गयी.
सोचा की दिल को संभल लेंगे, दिल को
संभाला ही था की वो फिर सामने दिख गयी.

RSD

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