जो तुम्हारे दर्द को समझ सके, तो समझो उसका रिश्ता है सितम के किसी रात से
जो तुम्हे खिला दे लिट्टी-चोखा तो समझो उसका रिश्ता है बिहार से.

रो रही है जिन्हीने भी चुना है नॉन-बिहारी पति
अभी भी वक्त है तुम चुन लो कोई एक बिहारी।

जितने भी दर्द की रात है, उन सबमे तेरी याद है
हम क्या संभाले खुद को बता, जा हर २४ घंटे पे एक रात है.

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२०२४


२०२४ में चलो लेले सात फेरें
दुनिया को छोड़ो, हम रहेंगे साथ
दिल-दिमाग और जिस्म, २४क्स जोड़े।

RSD

जिंदगी क्या है?


शहर में सभी को कुछ न कुछ मिला
मेरा नाम ले के उनको बहुत कुछ मिला
फिर भी गिला रखती हैं वो हम ही से
की सारे शहर में उन्हें मोहब्बत फिर कहीं ना मिला।
बदनाम खुद हुईं और हमपे तोहमत लगा गयी
की जिंदगी में उन्हें फिर कोई हम सा क्यों ना मिला?

जिंदगी क्या है?
नदी, ताल, तलैया, बहते जाना है
प्रेम क्या है?
दुःख, दर्द, काँटा, सहते जाना है
हुस्न क्या है?
छल, फरेब, धोखा, बचते जाना है.
बिहार क्या है?
घी, लिट्टी पे चोखा, खाते जाना है.

घी, लिट्टी पे चोखा, खाते जाना है.
होने पे बिहारी ना शर्माना है.
दुनिया भर का बोझा हमको उठाना है.
होने पे बिहारी ना शर्माना है.
पूरब-पश्चिम, उत्तर -दख्खिन,
कोने- कोने की गन्दगी हमको मिटाना है.
होने पे बिहारी ना शर्माना है.
भारत माँ का कोना-कोना साफ़-स्वच्छ बनाना है
होने पे बिहारी ना शर्माना है.

दुनिया को बिहारी एक गाली सी लगे
मुझे हर एक लड़की मेरे खूबसूरत बिहार सी लगे.

RSD

मैं बिहारी हूँ


जिंदगी में कोई ख्वाइश नहीं
एक ख्वाइश पे लुटा दी जिंदगी।
एक पल ही सही वो मेरी बाहों. में थी
दो घड़ी ही सही, बहुत जी ली जिंदगी।
कोई मिल जाए इस प्यास को मिटाने को
तो क्या, कहीं खो गयी जब जिंदगी।

बहुत तोडा है एक शक्श ने मुझे
पर दिल ही की आज भी मचल जाता है उसपे।
कहीं दिख जाए, मिल जाए, टकरा जाए, तो वो निकल जाता है
पर दिल है की, उसके ओझल होने तक निहारता है उसे.

ए दोस्त तू नादाँ हैं, या परेशान है
तेरी आँखे कह रही की तू बिस्क में बीमार है.
क्या है जो धीरे-धीरे तू टूट रहा?
लगता है तेरे यार का आज ही निकाह है.
सोचता है की कब, कैसे और क्यों वो बदल गयी
तू अब भी नहीं समझा, ये हुस्ने-अंदाज है.

बहुत बेचैन हो जाता हूँ की कोई तेरे करीब है
लौट आ, तेरा यार अब बहुत अमीर है.
तूने छोड़ दिया की मैं बिहारी हूँ
कम-से-कम देख लेती कितनी हसीं मेरी जमीन है.

RSD


एक पल तेरी आँखों ने जो इशारा कर किया
उम्र भर के लिए मुझे फिर आवारा कर दिया.
दो पल की इस ख़ुशी ने फिर
ताउम्र के लिए हमें तनहा कर दिया।
कितनी मंजिले बनी थी इन लकीरों पे
उन सबसे मेरी राहों को जुदा कर दिया।

मैं लिख रहा हूँ कविता तेरे प्यार में वो बबिता
तू सुनती नहीं तो जग को सूना रहा
मैंने खरीदें चूड़ी-कंगन, तेरे पावों के प्याल
तूने पहने ही नहीं तो जग में बाँट रहा.
एक पल आँख लड़ा के, तू भूल गयी दिल लगा के
तूने पूछा भी नहीं हाले-दिल तो मैं गमे-शब् गुनगुना रहा.
मैंने सोचा था एक घर बसा के, दीवारों पे तुमको सजा के
खिलाऊंगा लिट्टी -चोखा, तू मानी नहीं तो मैं सतुआ खा रहा.

उसने इरादा कर लिया था मुझे बर्बाद करने का
मैं भी बिहारी हूँ तो गोबर, गोइंठा, खप्पर, छप्पर सब चढ़ा गए.
इश्क़ में दुआओं का, दवाओं का, और फरियादों का कोई असर नहीं होता
जानते थे हम ये सब, जानते थे हम ये सब, पर उसकी आँखों में, आदाओं पे सब भुला गए.

धुप में – ना छावं में, मिलो मुझसे गावं में
कभी पनघट, कभी पोखर, कभी खलिहान में.
शहर मज़बूरी मेरी, ना यहाँ मैं किसी के चाह में
प्यार कब पनपा है, सवंरा हैं बंदिशों और घेराव में.
ना दिल्ली, ना महाराष्ट्र में, मिलो तुम हमसे बिहार में.

उम्मीदों के समन्दर को बाँध के निकला हूँ
जब से छोड़ा है गावं, बिहार, बस भटका और सिर्फ भटका हूँ.

RSD


उस शख्श को क्या कहें जिसकी आँखों में शराब है
दौलत से भरी दुनिया को छोड़ कर जिसे इस गरीब की चाहत है.

ये तू किसके इंतज़ार में दोपहर में बैठा है
इन राहों पे चल के कब कहाँ कोई लौटा है.

जब मैं मोहब्बत में था, तो खुल कर जंग हुई
वो अपने पे आ गयी तो मुझे रुलाने के लिए सबकी बन गयी.
कोई टिक न सका अपने ब्रह्मचर्य के पथ पे
जब वो मेनका, उर्वसी और रम्भा सी अप्सरा बन गयी.

तराशा है जिस जिस्म को मेरे आभूषणों ने
वो छनकाती हैं उन्हें किसी और की बाहों में.

मेरे दर्दे-इश्क़ का कुछ यूँ इलाज हो
टूटती चूड़ियां और दरकती लाज हो.
खली खिड़की और बंद किवाड़ के बीच
जलती एक आलाव हो.

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संग सुला के देख मुझे


ना तरसा के देख मुझे, ना तड़पा के देख मुझे
ठुकराने से पहले बस संग सुला के देख मुझे।
वो रात ना फिर आएगी जो ख्व्वाबों में हैं तेरे
ना यकीं हो तो दुनिया को आजमा के फिर देख मुझे।

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दिल्ली शहर में मेरी बिल्ली


इश्क़ करो तो बेवफा से, इस दर्द के बिना इश्क़ क्या
समन्दर को पता है कितने किनारो से गुजरी है दरिया।

खेलता रहूं मैं तुम्हारे वक्षों से
जैसे खेलती हैं लहरें किनारों से.
क्या तुम मुझे, मेरी जड़त्व को
लहरों सा स्वीकार करोगी?
और आओगी सर्वस त्याग कर, निर्वस्त्र मेरी आगोस में.

दीवारों पे आपकी तस्वीर लगा कर जी सकता हूँ
मगर इन साँसों का क्या जिनको आपका इंतज़ार है
इन रातों का क्या जिसमे दहकती अंगार है.

ख़्वाबों तक ही रह गयी मेरी प्यास
निगाहें मिली, बरसात भी हुई पर मिट ना सकीय ये आग
जा तुझे छोड़ रहा हूँ तेरी ही ख़ुशी के लिए
तू किसी की भी बाहों में झूल ले
पर ना मिलेगी मेरी बाहों की मिठास।

तू हरियाणवी छोरी मैं छोरा बिहार का
तेरी आँखों से हो के जाता है मेरा रास्ता बिहार का.
तू बलिष्ठ, बुलंद शेरनी, मैं बांका बिहार का
तेरी हाथ की लकीरों पे रचा है नक्शा मेरे गावं का.
तू मदमस्त, मोहनी, मृगनयनी, मैं तोमर बिहार का
तेरे वक्षों पे बसा हैं मेरा संसार प्यार का.

कितने वादे हुए, कितने इरादे बने,
कितने सपनों को थे हम पाले।
आज भी मेरे जिस्म पे उसके नाखूनों के खरोंचें हैं
सारे ही सपनों पे वो कर व्रजपात गयी.
दिल्ली शहर में मेरी बिल्ली भी भाग गयी.

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आवो महरानी।


दौलत जो कमाई वो दौलत नहीं थी
शोहरत जो कमाई वो शोहरत नहीं थी
तुमसे मिलने के बाद मेरे रब, ये जाना
की दुनिया जो मेरी थी वो मेरी तो नहीं थी.

ऐसा निष्ठुर ऐसा निरंकुश शासक है
तो कैसे गरीब के तन पे छ्डेगी चमड़ी।
आवो महरानी। ……
जो सजाता है गुलाब जेब में
वो क्या समझेगा रेत से मोह हमारी?
आवो महरानी। ……
हमने बेकार बहा दी दुनिया खून की
जब दासता में ही रह गयी जिंदगी।
आवो महरानी। ……

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लाखों में एक है बिहार मेरा


मैं हूँ बिहारी, लाखों में एक है बिहार मेरा
मुझे भाया ना कुछ जग में इस मिट्टी के सिवा।
कहीं छपरहिया, कहीं पुरवइया, कहीं बटोहिया, कहीं बिदेसिया
नाम अनेक, पर रंग सबका एक बिहार मेरा।
क्या समझेगा ये जमाना दर्द मेरा
चंद सिक्कों की खातिर मैं छोड़ आया वतन मेरा।
मेरे खेत वहीँ, बैल वहीँ, घर वहीँ, माया वहीं
पर मेरे लालच ने मुझको यहाँ बाँध रखा.

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