लाखों में एक है बिहार मेरा


मैं हूँ बिहारी, लाखों में एक है बिहार मेरा
मुझे भाया ना कुछ जग में इस मिट्टी के सिवा।
कहीं छपरहिया, कहीं पुरवइया, कहीं बटोहिया, कहीं बिदेसिया
नाम अनेक, पर रंग सबका एक बिहार मेरा।
क्या समझेगा ये जमाना दर्द मेरा
चंद सिक्कों की खातिर मैं छोड़ आया वतन मेरा।
मेरे खेत वहीँ, बैल वहीँ, घर वहीँ, माया वहीं
पर मेरे लालच ने मुझको यहाँ बाँध रखा.

RSD

Leave a comment