आवो महरानी।


दौलत जो कमाई वो दौलत नहीं थी
शोहरत जो कमाई वो शोहरत नहीं थी
तुमसे मिलने के बाद मेरे रब, ये जाना
की दुनिया जो मेरी थी वो मेरी तो नहीं थी.

ऐसा निष्ठुर ऐसा निरंकुश शासक है
तो कैसे गरीब के तन पे छ्डेगी चमड़ी।
आवो महरानी। ……
जो सजाता है गुलाब जेब में
वो क्या समझेगा रेत से मोह हमारी?
आवो महरानी। ……
हमने बेकार बहा दी दुनिया खून की
जब दासता में ही रह गयी जिंदगी।
आवो महरानी। ……

RSD

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