मैं बिहारी हूँ


जिंदगी में कोई ख्वाइश नहीं
एक ख्वाइश पे लुटा दी जिंदगी।
एक पल ही सही वो मेरी बाहों. में थी
दो घड़ी ही सही, बहुत जी ली जिंदगी।
कोई मिल जाए इस प्यास को मिटाने को
तो क्या, कहीं खो गयी जब जिंदगी।

बहुत तोडा है एक शक्श ने मुझे
पर दिल ही की आज भी मचल जाता है उसपे।
कहीं दिख जाए, मिल जाए, टकरा जाए, तो वो निकल जाता है
पर दिल है की, उसके ओझल होने तक निहारता है उसे.

ए दोस्त तू नादाँ हैं, या परेशान है
तेरी आँखे कह रही की तू बिस्क में बीमार है.
क्या है जो धीरे-धीरे तू टूट रहा?
लगता है तेरे यार का आज ही निकाह है.
सोचता है की कब, कैसे और क्यों वो बदल गयी
तू अब भी नहीं समझा, ये हुस्ने-अंदाज है.

बहुत बेचैन हो जाता हूँ की कोई तेरे करीब है
लौट आ, तेरा यार अब बहुत अमीर है.
तूने छोड़ दिया की मैं बिहारी हूँ
कम-से-कम देख लेती कितनी हसीं मेरी जमीन है.

RSD

Leave a comment