मोहिनी मनचली हो तुम


गजब कमसिन-कली हो तुम
जवानी में ऐसी ढली हो तुम
चांदनी वर्फीली हो तुम
मोहिनी मनचली हो तुम
झंकृत जिससे ह्रदय मेरा
रागनी कोई नई हो तुम
डंस रही हो जान-मानस को
नागिन कोई नवेली हो तुम.
कैसे आँखे फेर ले हम
जब लगती मन को भली हो तुम.
नाजुक छुई-मुई सी हो तुम
शाम गोधूलि हो तुम

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ललुआ – भइल, भलुआ -भइल


दर्द की रात ये ढलती नहीं,
पीता हूँ मगर ये चढ़ती नहीं।
कोई तो हो जो जिक्र छेड़ दे उनका जरा
इस ठंढ में आँसू पिघलती नहीं।

मिला जो मोहब्बत तो तू खुशनसीब है
वार्ना फिर मयखाना ही नसीब है.
उम्रभर की ख्वाइशें रख दी समेटकर तेरे जिस्म पर
वो एक जिस्म भी ना मिला तो ये कैसा नसीब है?
वक्त के थपेड़ों ने यूँ रख दिया उलझाकर
कोई भी एरा-गैर कह रहा की यही नसीब है.
बैठ जाएँ हारकर, हम ऐसे भी नहीं
बिहारियों ने अपने हाथों से लिखी नसीब है.
गंगा बाह रही है धरती पे, जाने किसके लिए
गंगा बाह रही हैं बिहार से, ये हमारा नसीब है.

कैसे कह दूँ की उनसे मुलाकात नहीं होती है?
जिस्म दूर है, पर बात रोज होती है.
आँखे मेरी आंसूं उनके, जिस्म मेरा सासें उनकी
मोहब्बत की रातें कुछ यूँ भी होती हैं.

ललुआ – भइल, भलुआ -भइल
फिर भी लागेलूं कमाल के
आवा ना रानी, बैठा ना रानी
बोरसी तपाल जाए आज साथ में

शरम करी, राम-नाम जपीं
अब छोड़ दिन इ-सब काम के
छापरहैया हैं
माज़ा मारेम जीवन के आखरी सांस ले

दामाद मिलल, बहू उतरल
फिर भी लागेलु सलोह साल के
आवा ना रानी, बैठा ना रानी
खा ल सतुआ आज साथ में.

शरम करी, राम-नाम जपीं
अब छोड़ दिन इ-सब काम के
छापरहैया हैं
माज़ा मारेम जीवन के आखरी सांझ ले.

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प्रभु-आएंगे


हमसे इश्क़ करने के लिए यूँ दावं -पेंच ना करो
कभी बैठ कर मेरे संग दान-दक्षिणा करो.

जिसकी चाहत में दरिया सुख गयी,
उस दरिया में फिर बदली बरसायेंगे।
प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे।
प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे।

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प्रभु आवतानी अयोध्या, त तानी आ जाएम कहियो बिहार हो


राउर भोली रे सुरतिया, मोहे मनवा हमार हो
प्रभु आवतानी अयोध्या, त तानी आ जाएम कहियो बिहार हो.

मन तो मोह लेते हो प्रभु मोहिनी इन आँखों से
अब तो रोज देखेंगे जब अयोध्या में विराजोगे।
चरणों से आपके मेरी दूरी अब तो मिटने वाली है
प्रभु दुनिया हमारी आज से हाँ बदलने वाली हैं
की आपके ही चरणों में हर साल दिवाली मनाएंगे।

वो दवा पिलाती भी हैं तो भाईजान कहके


दरियावों को किनारों की चाहत नहीं होती
समंदर तक आते-आते वो आग नहीं होती।
तू घमंड में जिसे पाकर, इतहास हैं उसका,
वो किसी की नहीं होती।
हम बिहारी हैं, नाप लेके हैं आँखों से आकार का
हम सी दें चोली तो वो छोटी नहीं होती।
तू जिसे चाहे चुन ले, तेरा अधिकार है
सबका ससुराल बिहार हो ऐसी किस्मत नहीं होती।

कितना तोड़ोगे हमको नजरों को चुराकर हमसे
हम तो पहले ही टूटे हैं दिल को लगा कर तुमसे।

इश्क़ में तुम्हारी गली का नजराना बहुत है
और इश्क़ में हमारी गली में मयखाना बहुत है.
तुम्हे मिलता है सबकुछ बिना पुकारे
हमारी पुकारों में बस तेरा नाम बहुत है.

कातिल की नजर को सलाम करके
हम बैठ गए है इश्क़ में नाकाम होके।
दर्द भी बता दें तो क्या भला
वो दवा पिलाती भी हैं तो भाईजान कहके।

A sip


I am taking alcohol as I can not take you
I am sipping it slowly as I can not do deep in you
The whole world is meaningless if ours legs don’t hold each other
I am jerking as I cannot jump on you.

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Shampoo


My sweetheart use shampoo on the boobs and its really helps us to ignite the night..

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चोली खोलके


चोर ले गइल चोली खोलके
रह गईनी हम ओठ दाब के
राजा, तहरे इजतिया के ख्याल रहल हो
ना त जार देतीं मुआना के बोरसी के अगिया से.

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तू सिर्फ चाँद नहीं है


तेरी मोहब्बत में सिर्फ हम ही तन्हा नहीं हैं
जिसने भी देखा है तुम्हे, फिर चैन से बैठा नहीं है.

ए चाँद, तू सिर्फ चाँद नहीं है,
तू मंजिल है, जलन है, आग है, द्वेष है, इंतिजार है, इन तारों का.
तुम्हारा जिस्म, सिर्फ एक जिस्म नहीं है,
ये प्यास है, मयखाना है, अरे जाम हैं हम दीवानों का.
ये शाम, सिर्फ एक शाम नहीं है,
ये दर्द है, आंसू हैं, यादें हैं तेरी बाहों का.
ये बिहार, सिर्फ एक प्रदेश नहीं हैं,
ये नाम है राजेंद्र प्रासाद, जयप्रकाश, महामाया प्रसाद,
अरे नाम है भारत के मस्तक के सितारों का.

हमें याद है तेरी जुल्फों के साराएँ रातों का काट जाना
अब भी ये रातें तेरी यादों से ही कटती हैं.

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तरंगिणी हो


ह्रदय की तुम स्वामिनी, मेरे मन में विराजी हो
चंचल नयनों से वेधती, हर पल मेरी साँसों की वेदी हो.
सरिता सी नित बह रही, कुरेदती हो पाषाण को
टूट-टूट, बिखर रहा मैं नित, तुम प्रबल-प्रखर-प्रचंड, तरंगिणी हो.
तुम्हारे मतवाले नयनों की चाल, जैसे अरण्य में स्वछंद विहरति मृगनी हो.

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