शबरी के राम


जल रही है ज्वाला मन में, जैसे कोई अंगार है
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
प्राणों की वेदी भी प्रभु आप पे निसार है.
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
दीखते नहीं हैं सूक्ष्म कांटें अब तो हाँ इन आँख से
बहरती -सुहारती हूँ पथ को अपने हाथ से.
इस निर्जन कुटिया में प्रभु बस आपकी ही आस है
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
क्या दिन और क्या रात प्रभु, बिन आपके सर्वत्र अन्धकार है
बरसात-गर्मी-बसंत, बिन आपके, सब एक सामान है.
कापंते-जर्जर तन से ये आखिरी गुहार है
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
उड़ जाए ये प्राण पखेरू, उसके पहले प्रभु-चरण पखारूँ
इसके सिवा ना और कुछ भी ह्रदय में बसी चाह है.
इस निर्बल-अबला की लाज, प्रभु आपके ही हाथ है.
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.

RSD

आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी


आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
तन से गंदे, पेट के भूखे, बिन पहने, कपडे
फिर से करेंगे तुम गोरों की चाकरी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
फिर जय-जय कारा, होगा तुम्हारा
तो क्यों खाई सालों तक सीने पे गोली
फीकी हैं तुम्हारे सौंदर्य के आगे हमारे शहीदों की कुर्बानी
यही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी।

RSD

प्रभु आएंगे, और हम निहारेंगे


प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे
५०० -साल की प्रतीक्षा,
प्रभु आएंगे, और हम निहारेंगे।
बरसों से बंजर ह्रदय पे प्रभु प्रेम की बरसा बरसायेंगे।
प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे।

ये विश्वास अटल लिए मन में हम
बैठे थे बरसों हस अरण्य में हम
प्रण था की आकुल मन और विकलित ह्रदय से
अनंत-अंत तक हम पुकारेंगे।
प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे
५०० -साल की प्रतीक्षा,
प्रभु आएंगे, और हम निहारेंगे।

जीवन और जीवन की धारा,
बिना राम नहीं इनका किनारा
एक राम नाम ही, सबका सहारा
जप-जप कर राम नाम,
प्रभु के पग-पग में हम दीप जलाएंगे।
प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे
५०० -साल की प्रतीक्षा,
प्रभु आएंगे, और हम निहारेंगे।

हिन्द की इस पावन धरा पे
फिर से श्री राम किलकारेंगे, विराजेंगे।
अद्भुत है जीवन की माया
इस माया में मैं बंध गया
मेरे हर बंधन, बेड़ी को प्रभु काटेंगे, पार लगाएंगे।
प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे
५०० -साल की प्रतीक्षा,
प्रभु आएंगे, और हम निहारेंगे।

A strong house


Evolution is the dawn where
one ends its journey and the other begins.
Your eyes are the point in this 3D or
multidimensional word where my heart makes sharp turns.
In this temporary world
where oceans, rivers, trees, everything has a half-life
I want to work hard and save money to build a strong house for us.
A house where I will see you in a mirror and a pond.
A house that will last throughout many generations
to tell the story of a journey like the story of a dinosaur.
Only a tale crosses multiple eras during evolution
to teach ancestral history.

RSD

कुमुदिनी


तुम छा रही हो ऐसे, जैसे छा जाती है बदली
मैं भ्रमित हो रहा हूँ ऐसे, जैसे भौंरा देख कुमुदिनी।
मेरे प्राणों से भी प्रिये लगने लगी हो पल में
जाने कल क्या होगा जब छलोगी बाहों में भर के

RSD

इश्क़ की चाय


इश्क़ के नाम पे दुकान खोलेंगे
पहनाएंगे उन्हें चूड़ियाँ, ये ही काम करेंगे।
वो तो समझने से रहीं हाल-दिल हमारा,
हम बस उनको देख के दिल बहला लिया करेंगे।

ठंढी हवाओं का असर रात की तन्हाई है
समंदर से क्या पूछते हों की क्या होती बेवफाई है
वो तो चढ़ गयीं डोली हँसते-कूदते, पर उनकी एक शहनाई
की कीमत, लाखों बेबस माँओ की दुहाई है.

जवानी के ढलने में देर नहीं लगती
रेत के फिसलने में देर नहीं लगती
वादे सारे शिकवे हुए, और हसरतें कांटे
हुश्न को बदलने में देर नहीं लगती।

पत्थरों में हो संगीत
ऐसी हो मेरी प्रीत

मेरी साँसों की तपिस पे, इश्क़ की चाय बना के
अधरों का शहद मिला के, आँखों से पीला दे.

RSD

आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी


मेरी तन्हाई में शोर बहुत है, इस शोर में मेरी तन्हाई बहुत है
तू मुझे मिली तो नहीं, पर मेरे लिए ये तेरा दर्द ही बहुत है.
दुनिया मुझे नहीं जानती, पर दुनिया जानती है, मैं बिहारी हूँ.
मेरी असफल जिंदगी में, मेरी गरीबी पे, मेरी भुखमरी पे, ये एक तमगा ही बहुत है.
तू जिन चरणों को छूकर, घमंड में चूर बहुत है.
उसे ठोकरों में तौला हैं कई बार मेरे पुरखों ने,
तू ले जा सारा इतिहास, मेरे इतिहास के लिए ये एक पंक्ति बहुत है.
तुम्हारी भूख, तुम्हारी सजावट, शौक, ऊंचाई, सफलता के लिए
मुबारक हो तुमको तुम्हारी अमीरी, मेरे लिए लिट्टी-चोखा ही बहुत है.

आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
तन ढकने को भी नहीं मैले -कुचैले कपड़े
खाने को नहीं दो रोटी
पर ये रानी तुम्हे देंगे भेंट में सोने की थाली
ये ही आगा हुयो है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
हम भूलें नहीं हैं वो १०० सालों की पीड़ा
ना भूल पाएंगे जालियावाला बाग़
पर ह्रदय पे पत्थर रख के, ये रानी, उतारेंगे हम तेरी आरती
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.

तुम्हारे लिए दिल के अरमान सजा के गुजारी मोहब्बत लम्हों में
तुम तो मेरे ना हुए कभी पर रहा मैं सदा तुम्हारे ही ख़्वाबों में.

RSD