आँखों में मदिरा, अधरों पे अंगार हैं
तेरी चढ़ती जवानी जैसे मेरा बिहार है
वहाँ गंगा की धार, यहाँ तेरे नयनों के बाण हैं
वहाँ नितीश कुमार, यहाँ तेरी हिरणी सी चाल हैं
वहाँ लिट्टी, घी, अँचार, यहाँ तेरे सोलह श्रृंगार हैं
वो सब मेरे ह्रदय में और तू भी विराज है.
कौन कहेगा तुझे वेवफा
तेरे संग एक रात पे ता उम्र निसार है.
मिश्री की कोई डाली हो तुम
या चासनी में ताली हो तुम.
तुम्हारे वक्ष जैसे पहली की क्यारी हो तुम
तुम्हारे कमर जैसे मेरे खेतों में गेहूं की बाली हो तुम.
जो भी हो जैसी भी हो पर प्यारी हो तुम
देखो, चुनना साथी कोई बिहारी को तुम.
नैनों से कातिल, और कमर से कंटीली हो तुम
नागिन कोई नवेली हो तुम.
पर देखो, चुनना सपेरा कोई बिहारी को तुम.
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