इस बार की होली को रंगीन कर देंगे
तुम कहो तो जुर्म कोई संगीन कर देंगें
जितनी भी शिकायतें हैं साल भर से तुम्हारी
मिलते ही सबको १-२-३ कर देंगें।
RSD
इस बार की होली को रंगीन कर देंगे
तुम कहो तो जुर्म कोई संगीन कर देंगें
जितनी भी शिकायतें हैं साल भर से तुम्हारी
मिलते ही सबको १-२-३ कर देंगें।
RSD
ये पढ़ने वाले लोग यूँ ही नहीं परेशान है
की शहर की सभी किताबों में लिखा तेरा नाम है.
जुल्म की इंतहा क्या होगी
दिमाग से तेज लोगों का दिल तेरा गुलाम है.
RSD
वो अब एक चाय के लिए भी नहीं पूछते
जो कल तक मेरे घर आते बहुत थे.
भीड़ में अब भी खींचता है कोई
मंजिले उम्र भर का पड़ाव नहीं होती।
तुझे इश्क़ है दिल से तो दिल लगा
यहाँ जिस्म से भी रात गुलजार नहीं होती।
तूने तोडा है इस कदर मुझे की अब
किसी और से जुड़ने की कोई बात नहीं होती।
मिलेगा लिट्टी -चीखा तो बैठ जाएंगे खाने को
वरना जिस्म को अब थकन नहीं होती।
तेरे इंतज़ार में अब बस बेबसी है
मेरी तन्हाई का दर्द ये दुरी नहीं तेरी खामोशी है.
RSD
The night is full of dreams.
But the sky is empty.
Because your eyes stole all my stars.
यूँ ही खड़ा नहीं हूँ तेरे शहर में
मेरे सर पे आशीष बहुत है.
वो कहते हैं की मैं उनका दीदार नहीं करता
मेरे दुश्मनों के महफ़िल में वो बैठता बहुत है.
जिनके सीने में दिल है कह दो खुदकुशियां ना करें
शहर में अब खुलने लगी दुकाने बहुत हैं.
इश्क़ में कटरीना नहीं तो मलिक्का बहुत हैं
जिन्हे वो भी नहीं, उनके लिए मिया खलीफा बहुत है.
रात में हर किसी का भरोसा नहीं करते
यहाँ अंधेरों में चलते खंजर बहुत हैं.
तुम जिसे चाँद कह रहे हो शहर का
उसमे तो दाग बहुत है.
RSD
किताबों में आज भी तस्वीरें बहुत है
इश्क़ में ये दिल टुटा बहुत है.
तुझे प्यास लगे तो लहू से भी मिटा देंगे
मेरी जिंदगी में प्यास बहुत है.
जिस्मानी सुखों का अंत नहीं
राहे-दिल में भी दुःख बहुत है.
मुस्कुराता नहीं हूँ, ये शिकायत है उन्हें
की इन लबों ने नमक पीया बहुत है.
जमाने की नजरों में पिछड़ा होगा बिहार
मगर उस जमीन पे खुशियां बहुत हैं.
यकीं ना हो तो घर बसा के देखो बिहारी का
वहाँ के ससुराल में सुकून बहुत है.
यूँ ही नहीं कहते हैं हमें बाबूसाहेब
छपरा-सीवान, पटना तक हमारा रोआब बहुत है.
हम अब भी ज़िंदा हैं उसे यकीन नहीं होता
इश्क़ में हमें जिसने रुलाया बहुत है.
हमें उतरा बीच हाइवे पे दोस्तों ने ही कार से
मगर बेचनेवालों को भी खुदा ने बनाया बहुत है.
हमने किसी को थमा नहीं उसके ठुकराने के बाद
उसने भी ज़माने को नचाया बहुत है.
उम्मीदों के समंदर में सब है बस वो नहीं
जिसके किनारों पे हमने घर बनाया बहुत है.
जिंदगी की तलाश में कुछ भी नहीं तरस पाएं
इस मुकाम पे भी ये मलाल बहुत है.
RSD
Massechutes, Boston, and Harvard
A dream that I chased at the
cost of my motherland.
I prefer walking
In the morning Dew to
a night full of dreams.
RSD