किताबों में आज भी तस्वीरें बहुत है
इश्क़ में ये दिल टुटा बहुत है.
तुझे प्यास लगे तो लहू से भी मिटा देंगे
मेरी जिंदगी में प्यास बहुत है.
जिस्मानी सुखों का अंत नहीं
राहे-दिल में भी दुःख बहुत है.
मुस्कुराता नहीं हूँ, ये शिकायत है उन्हें
की इन लबों ने नमक पीया बहुत है.
जमाने की नजरों में पिछड़ा होगा बिहार
मगर उस जमीन पे खुशियां बहुत हैं.
यकीं ना हो तो घर बसा के देखो बिहारी का
वहाँ के ससुराल में सुकून बहुत है.
यूँ ही नहीं कहते हैं हमें बाबूसाहेब
छपरा-सीवान, पटना तक हमारा रोआब बहुत है.
हम अब भी ज़िंदा हैं उसे यकीन नहीं होता
इश्क़ में हमें जिसने रुलाया बहुत है.
हमें उतरा बीच हाइवे पे दोस्तों ने ही कार से
मगर बेचनेवालों को भी खुदा ने बनाया बहुत है.
हमने किसी को थमा नहीं उसके ठुकराने के बाद
उसने भी ज़माने को नचाया बहुत है.
उम्मीदों के समंदर में सब है बस वो नहीं
जिसके किनारों पे हमने घर बनाया बहुत है.
जिंदगी की तलाश में कुछ भी नहीं तरस पाएं
इस मुकाम पे भी ये मलाल बहुत है.
RSD