मंजिले उम्र भर का पड़ाव नहीं होती


वो अब एक चाय के लिए भी नहीं पूछते
जो कल तक मेरे घर आते बहुत थे.

भीड़ में अब भी खींचता है कोई
मंजिले उम्र भर का पड़ाव नहीं होती।
तुझे इश्क़ है दिल से तो दिल लगा
यहाँ जिस्म से भी रात गुलजार नहीं होती।
तूने तोडा है इस कदर मुझे की अब
किसी और से जुड़ने की कोई बात नहीं होती।
मिलेगा लिट्टी -चीखा तो बैठ जाएंगे खाने को
वरना जिस्म को अब थकन नहीं होती।

तेरे इंतज़ार में अब बस बेबसी है
मेरी तन्हाई का दर्द ये दुरी नहीं तेरी खामोशी है.

RSD

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