मैं लिख रहा हूँ तेरी जुल्फ पे किताब
मेरी कलम लिख देती हैं तेरे रूप को शराब।
मैं लिखता हूँ तेरी आँखों को अपना अंतिम पड़ाव
मेरी कलम लिख देती हैं तेरे वक्षों पे विश्राम।
मैं लिखना चाहता हूँ तुझे चाँद और मेरा आसमान
मेरी कलम लिखती हैं तुझे मेरा गावं-मेरा बिहार.
तेरे जिस्म की अंगड़ाइयां तेरी आखों की गहराइयों पे भारी हैं
तू मिल जाए तो आग लग जाए, तू राख में दबी ऐसी चिंगारी है.
तू दिन भर की धुप के बाद की एक चाँद है
तू लिट्टी-चोखा पे आम की आचार है.
तू मिल जाए तो झूम उठे हर राही
तू सतत-अभियान का आखिरी पड़ाव है.
RSD