जब भी मिलोगी तुम्हे जला के रख दूंगा
बारूद बिछा के दिल में सुलगा के रख दिया है.
जिसको भी हरा नहीं पाया मैं दिन के उजालों में
उसे रात के अंधेरों में काट के रख दिया है.
दिल की दुनिया में सिर्फ तेरा ही है साया
मैंने सरहदों को इस कदर बाँध दिया है.
ग़ालिब की बस्ती में तन्हा तो कोई नहीं हैं
टूटे दिल में मैंने दर्द को यूँ रख दिया है.
इतना भी ना तोड़ो, मैं मुस्करा ना हाँ सकूँ
एक मुस्कराने के लिए ही है तुझको छोड़ दिया है।

RSD

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