अंगों-ने-अंगों से टकरा के बिजली बना दी
कम्बख्त फिर जलने से कौन बचता?
सबने कहा की परमित ना जा उसके पास
मगर राजपूत रण से पीछे कैसे हटता?
जवानी है, जवानी है, जवानी है-२
तभी तो निगाहों में कहानी है.
कोई बंद कमरे में सुलग रहा
कोई बहती दरिया का पानी है.
वक्त के भीड़ में तुम्ही बगल गए
हम तब भी, अब भी अकेले हैं.
तेरी आँखे ऐसी, की तनहा शराब हो गयी
तेरे जिस्म पे रेंग के हवा मेरे गावं की
जो मीठी थी, अब आग हो गयी
तू क्या खुद को संभाल रही है और किसके लिए
बिहार में चर्चा है की तू अब जवान हो गयी.
RSD