जय श्रीराम, जय-जय श्रीराम


दशरथ के पुत्र थे कौशल्या के लाल
अयोध्या में जन्मे थे स्वयं ब्रह्म के अवतार।
जय श्रीराम, जय-जय श्रीराम।
चार-चार भाइयों का लेकर साथ
अयोध्या में जन्मे थे स्वयं ब्रह्म के अवतार।
जय श्रीराम, जय-जय श्रीराम।
भक्त जिनके महावीर-महाबली हनुमान
अयोध्या में जन्मे थे स्वयं ब्रह्म के अवतार।
जय श्रीराम, जय-जय श्रीराम।

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रघुनन्दन


भक्त की पुकार को अब तो सुन लो हे रघुनन्दन
भक्त का संसार हो आप हे रघुनन्दन।
चरण-रपर्श मात्र से तर गयी अहिल्या पत्थर से
भक्त का भी अब उद्धार करो हे रघुनन्दन।
ब्रह्माण्ड में कुछ भी कठिन नहीं, जिसके ह्रदय में आप हो रघुनन्दन
हनुमान जी के साथ फिर मेरे ह्रदय में विराज करो हे रघुनन्दन।

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राही बदल लूंगा


मैं अपनी राहों को नहीं बदलूंगा, मैं अपने राही बदल लूंगा।
मंजिलें मेरे इंतज़ार में हैं, तो मैं मोहब्बत छोड़ दूंगा।
कितने ऐसे जिस्मों को छोड़ा हैं जिंदगी के इम्तिहान में
मैं इम्तिहानों से नहीं, खुशियों से मुख मोड़ लूंगा।

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मेरे राम, श्रीराम, जय राम, जय-जय राम


धुन में तुम्हारे रम जाऊं जैसे रमे हनुमान
जुग- पे-जुग हाँ बीत जाए, ऐसे लगाऊं ध्यान।
मेरे राम, श्रीराम, जय राम, जय-जय राम
मेरे राम, श्रीराम, जय राम, जय-जय राम.
आँखों की एक मदिरा, ध्याऊँ तुम्हे सुबहों-शाम
साँसों में एक ज्वाला निरंतर, जपता रहूं ये ही नाम
मेरे राम, श्रीराम, जय राम, जय-जय राम
मेरे राम, श्रीराम, जय राम, जय-जय राम.
अरे जग तो है एक माया, इस माया के तुम काट
शरण तुम्हारे जो भी है उसको है ब्रह्म-ज्ञान।
मेरे राम, श्रीराम, जय राम, जय-जय राम
मेरे राम, श्रीराम, जय राम, जय-जय राम.
पशु -पंक्षी, राजा-रंक, सब हैं एक सामान
मिटटी में मिल जाते हैं, फिर कैसा अभिमान?
मेरे राम, श्रीराम, जय राम, जय-जय राम
मेरे राम, श्रीराम, जय राम, जय-जय राम.
जग ढूंढें जिस सत्य को, उसकी राह है आसान
सच्चे दिल से जो बोल दे एक बार तेरा नाम.
मेरे राम, श्रीराम, जय राम, जय-जय राम
मेरे राम, श्रीराम, जय राम, जय-जय राम.

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जय-जय सिया-राम की


बजरंगी के चरणों में शीश नवाये बैठा हूँ
एक बार दरस दे दो श्रीराम, ये गुहार लगाए बैठा हूँ.
दिन-रात यूँ ही कट रहे, साँस भी अब घुट रहे.
छांट दो अँधेरा जीवन से, मेरे राम, ये आस लगाए बैठा हूँ.
एक बार दरस दे दो श्रीराम, ये गुहार लगाए बैठा हूँ.
उस राह का पता नहीं जो जाती हों तेरे धाम
शबरी सा धैर्य नहीं जो उम्र भर देखूं राह
मैं लालच में, मेरे राम, राम-नाम की जाप लगाए बैठा हूँ.
एक बार दरस दे दो श्रीराम, ये गुहार लगाए बैठा हूँ.

अरे कृपा करो हनुमान जी, भक्ति जगा दो श्रीराम की
मैं भी गाऊं संग तुम्हारे, जय-जय सिया-राम की.
ना मैं बल से बलवान हूँ, ना मैं धन से धनवान हूँ
तभी पुकारता हूँ आपको, मेरी राह बना दो हनुमान जी.
मैं भी गाऊं संग तुम्हारे, जय-जय सिया-राम की.
शबरी सा धैर्य जगा दो, भक्ति दे दो स्वयं आप सी
मैं भी गाऊं संग तुम्हारे, जय-जय सिया-राम की.
अंगद सी हो आस्था, और ज्ञान दे दो आप सी
मैं भी गाऊं संग तुम्हारे, जय-जय सिया-राम की.
अरे कृपा करो हनुमान जी, भक्ति जगा दो श्रीराम की
मैं भी गाऊं संग तुम्हारे, जय-जय सिया-राम की.

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विस्तार


मन के विस्तार में ना खुद को बाँध
मन को बाँध कर खुद का कर विस्तार.

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श्री कृष्णा


अगर भगवान कहीं है तो वो सिर्फ श्री कृष्णा हैं
और अगर श्री कृष्णा कहीं हैं तो सिर्फ वो ही भगवान् हैं.
खडग-कृपाण, तीर-धनुष से सुसज्जित रण में जिसने ज्ञान दिया
उस दिव्या ज्ञान के आगे, अहिंसा का क्या स्थान है?

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सारी रात आज बिहार लिखूंगा


अपनी मोहब्बत का मैं दास्ताँ लिखूंगा
तुम्हारे जिस्म पे सारी रात आज बिहार लिखूंगा।
तेरी कमर को छपरा, वक्षों को सिवान लिखूंगा
तुम्हारे जिस्म पे सारी रात आज बिहार लिखूंगा।
तेरे अधरों को लिट्टी, गालों को चोखा
उसपे इन आँखों को आम का आचार लिखूंगा।
तुम्हारे जिस्म पे सारी रात आज बिहार लिखूंगा।
तुम्हारें पावों को धुरौन्धा, बाहों को पटना,
ढोंढ़ी को अपना मलमलिया बाजार लिखूंगा।
तुम्हारे जिस्म पे सारी रात आज बिहार लिखूंगा।

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