बजरंगी के चरणों में शीश नवाये बैठा हूँ
एक बार दरस दे दो श्रीराम, ये गुहार लगाए बैठा हूँ.
दिन-रात यूँ ही कट रहे, साँस भी अब घुट रहे.
छांट दो अँधेरा जीवन से, मेरे राम, ये आस लगाए बैठा हूँ.
एक बार दरस दे दो श्रीराम, ये गुहार लगाए बैठा हूँ.
उस राह का पता नहीं जो जाती हों तेरे धाम
शबरी सा धैर्य नहीं जो उम्र भर देखूं राह
मैं लालच में, मेरे राम, राम-नाम की जाप लगाए बैठा हूँ.
एक बार दरस दे दो श्रीराम, ये गुहार लगाए बैठा हूँ.
अरे कृपा करो हनुमान जी, भक्ति जगा दो श्रीराम की
मैं भी गाऊं संग तुम्हारे, जय-जय सिया-राम की.
ना मैं बल से बलवान हूँ, ना मैं धन से धनवान हूँ
तभी पुकारता हूँ आपको, मेरी राह बना दो हनुमान जी.
मैं भी गाऊं संग तुम्हारे, जय-जय सिया-राम की.
शबरी सा धैर्य जगा दो, भक्ति दे दो स्वयं आप सी
मैं भी गाऊं संग तुम्हारे, जय-जय सिया-राम की.
अंगद सी हो आस्था, और ज्ञान दे दो आप सी
मैं भी गाऊं संग तुम्हारे, जय-जय सिया-राम की.
अरे कृपा करो हनुमान जी, भक्ति जगा दो श्रीराम की
मैं भी गाऊं संग तुम्हारे, जय-जय सिया-राम की.
RSD