नजर की ख्वाइस, नजर भर रही
शहर को पता है, वो बस सहर भर रहीं।
मैं बुलाता भी उनको तो कैसे मगर?
जो उम्र भर का कह के, बस एक पहर भर रहीं।
सुना है शहर में ऐसा कोई घर नहीं
जहाँ नहीं वो कभी एक पहर भर रहीं।
RSD
नजर की ख्वाइस, नजर भर रही
शहर को पता है, वो बस सहर भर रहीं।
मैं बुलाता भी उनको तो कैसे मगर?
जो उम्र भर का कह के, बस एक पहर भर रहीं।
सुना है शहर में ऐसा कोई घर नहीं
जहाँ नहीं वो कभी एक पहर भर रहीं।
RSD