वक्त ऐसा भी नहीं
तारीफ़ के मैं काबिल नहीं
वक्त जिसको भी देख रहा
वो मेरा साहिल नहीं।
ख्वाब कितने टूट गए
फिर भी मैं चल रहा
रुक जाऊं मैं कहीं
वो शहर मुझे मिला नहीं।
तू खुदा हैं कहीं तो
दिख मुझे रहा नहीं
मैंने जिसे खुदा कहा
वो मेरा अब रहा नहीं।
उम्र भर की ख्वाइशे
सिमट कर जहाँ एक हुई
वो भी कोई चुरा गया
किस्मत का धनि मैं रहा नहीं।
दर्द में डूबी हो रात
और वो ना याद आएं
हो वो एक ना ख्वाब आयें
ऐसी कोई रात यहाँ नहीं।
RSD