सावन


नयनों से बड़ी कातिल, रखती है चंचल आदयें वो
भाती हैं मुझे जब जयकारा लगाए वो.
यूँ तो शर्मा जाती है प्रेम में
पर सावन में लगते है हाला-लगाए वो.
मन से भोली, नजरों की शातिर
बैठी हैं दुनिया को नचाये वो.
भाती है मुझे जब ॐ शंकर गाये वो.
हर-हर महादेव।

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