खिलौना


सपनों का शहर अब खिलौना बन गया है
मौसम कोई भी हो, गम बिछौना बन गया हैं.
जिन बाहों को हमने पहनाई चूड़ियाँ
कल रात उन चूड़ियों को कोई तोड़ गया हैं.
किस-किस का हिसाब
किस-किस की किताब में लिखा है.
मेरी कलम ने बेवफा में
सिर्फ उसका नाम लिखा है.

RSD

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